भोपाल हमीदिया में ब्लैक फंगस मरीजों के साथ अब दो नई परेशानियां हैं। पहली- ऑपरेशन के बाद यहां से जिन मरीजों को डिस्चार्ज कर रहे हैं उनको बेहद महंगी टेबलेट पोसाकोनाजोल नहीं दी जा रही है। दूसरी- सरकार की ओर से अब सस्ते इंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। क्योंकि इंदौर, जबलपुर और सागर में सस्ता इंजेक्शन लगाने के बाद कई मरीजों को साइड इफेक्ट हुए। मरीजों ने ठंड लगने, सिरदर्द, कंपकंपी, घबराहट, उल्टी, दस्त होने की शिकायत की। इसके बाद जबलपुर में इस इंजेक्शन का उपयोग अभी बंद कर दिया गया है।
अब तक सरकार लीपाेसोमल इंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन ही उपलब्ध करा रही थी। एक इंजेक्शन की कीमत 3000 से 7000 रुपए तक होती है। जबकि, प्लेन इंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन की कीमत महज 300 से 700 रुपए है। सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन नि:शुल्क लगाए जा रहे हैं। जबकि, निजी अस्पतालों में मरीज को भुगतान करना होता है। तीन दिन पहले तक लीपाेसोमल इंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन ही उपलब्ध कराए जा रहे थे। लेकिन तीन दिन पहले 14 हजार इंजेक्शन आए वो प्लेन इंफोटेरिसिन बी इंजेक्शन थे। पिछले दो दिन से हमीदिया में यही सस्ते इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।
सस्ते और महंगे के बीच में मरीज
प्लेन इंफोटेरिेसिन बी
- इस इंजेक्शन की एंटीफंगल एक्टिविटी उतनी अच्छी नहीं है।
- मरीज को यह एक दिन में 50 एमजी से ज्यादा नहीं दे पाएंगे।
- ऐसे में मरीज को टोटल डोज देने में ज्यादा दिन लगते हैं।
- किडनी में इफेक्ट करता है। हर दिन रीनल फंक्शन टेस्ट जरूरी।
- इलेक्टोलाइट कम होता है। ऐसे में हर दूसरे दिन पोटेशियम टेस्ट जरूरी।
- जिन मरीजों को परेशानी होगी उनको ज्यादा भर्ती रखना पड़ेगा। सख्त आब्जर्वेशन जरूरी है।
लीपोसोमल इंफोटेरिसिन बी
- इस इंजेक्शन की एंटीफंगल एक्टिविटी ज्यादा अच्छी है।
- यह इंजेक्शन मरीज को एक दिन में 250 एमजी तक दे सकते हैं।
- ऐसे में मरीज को टोटल डोज कम समय में दिया जा सकता है।
- मरीज की किडनी में साइड इफेक्ट इसमें ना के बराबर होता है।
- इलेक्टोलाइट कम होने की समस्या भी सामान्यत: नहीं होती है।
- मरीजों को कम समय में अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा सकता है।
- देखरेख की जरूरत कम पड़ती है।
इन्हें नहीं दी टेबलेट; पिछले दो दिन में 25 मरीजों को दी छुट्टी
जिन मरीजों को किडनी संबंधी कोई परेशानी पहले से है उन्हें सस्ते इंजेक्शन नहीं लगा सकते हैं क्योंकि इसका सीधा असर मरीज की किडनी पर पड़ता है। अगर ऐसे मरीज का ऑपरेशन हुआ है और उनको इंजेक्शन नहीं लगाना है तो उन्हें अस्पताल से छुट्टी देते हैं। तब इनको पोसाकोनाजोल टेबलेट दी जाती है। लेकिन, पिछले दो दिन में जिन 25 मरीजों की छुट्टी दी गई उनको ये गोली नहीं दी गई हैं। अब मरीज बाहर से गोली खरीदनी होगी। जबकि ये गोली इतनी महंगी है कि 12 गोली का एक पत्ता 10500 रुपए से 13000 तक का आता है। डॉक्टरों की मानें तो किसी भी मरीज को कम से कम एक महीने तक रोज तीन गोली खानी होती है। इसके लिए अब मरीज को 78750 रुपए खर्च करने होंगे।
हमारे पास पोसाकोनाजोल की सप्लाई बहुत कम है। ऐसे में जो मरीज भर्ती हैं उन्हीं को यह गोली दी जा रही है। जिन मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे रहे हैं उन्हें अभी गोली नहीं दी जा रही हैं।

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