शिवपुरी रोजगार हासिल करने के लिए 3 साल पहले बेरोजगार युवकों ने संविदा शिक्षक बनने पात्रता परीक्षा दी थी। लेकिन तब से अब तक नौकरी मिलना तो दूर दस्तावेजों का सत्यापन भी नहीं हो सका। हालात यह हैं कि पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड पास युवक अब सब्जी बेचकर या खेत में हल चलाकर जीवनयापन कर रहे हैं।
वही दस्तावेजों का सत्यापन कराने आए युवकों ने आरोप लगाया कि विभागीय कर्मचारियों ने जिन युवकों से साठगांठ कर ली उनके दस्तावेजों को तो सत्यापित कर दिया और हमारे दस्तावेजों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है। कुल मिलाकर कलेक्ट्रेट परिसर में बेरोजगार युवाओं ने दस्तावेज परीक्षण के दौरान अपनी पीड़ा जाहिर की।
दरअसल, अब से 3 साल पहले सन 2018 में वर्ग 1, 2, 3 में संविदा शिक्षक बनने के लिए पात्रता परीक्षा का आयोजन किया गया था। इसमें कई युवक-युवतियों ने परीक्षाओं में भागीदारी कर शिक्षक बनने अपना भाग्य आजमाया था। बहुत से शिक्षक शिक्षिका ऐसे हैं, जिन्होंने शिक्षक बनने की पात्रता परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण कर ली। अब उन्हें दस्तावेजों का परीक्षण कराना है और इस परीक्षण के दौरान सारे दस्तावेज ऑनलाइन भोपाल पहुंचेंगे। इसके बाद जिनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सही पाया जाएगा उन्हें नियुक्ति पत्र जारी होंगे। दस्तावेजों का सत्यापन कराने आदिम जाति कल्याण विभाग के दफ्तर आए युवाओं ने आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों के वेरिफिकेशन में गड़बड़ी की जा रही है।
ऐसे युवा जिन्होंने एक ही साल में दो परीक्षा उत्तीर्ण की है उनके दस्तावेजों को अभ्यर्थियों से सांठगांठ कर वेरीफाई करके ओके कर दिया गया।जबकि हम जैसे युवाओं के दस्तावेजों का परीक्षण नहीं किया जा रहा। हमें अयोग्य ठहराया जा रहा है। सबलगढ़ मुरैना से शिवपुरी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराने आए युवक उदयभान बघेल ने बताया कि उसने डी एड रेगुलर किया है। और ग्रेजुएशन भी कंप्लीट किया है। बावजूद इसके उसके आवेदन को होल्ड पर रख दिया है। कारण बताया जा रहा है कि एक ही सत्र में डिप्लोमा और डिग्री हासिल नहीं कर सकते। जबकि अन्य लोगों के आवेदनों को विभाग ने स्वीकार कर लिया है, केवल हमको बाहर का रास्ता दिखाया है। इसी तरह से कुछ अन्य युवाओं ने भी अपनी परेशानी व्यक्त कर दस्तावेजों का सही वेरिफिकेशन करने की मांग विभागीय अधिकारियों से की ।
शिक्षक बनने 3 साल पहले दी परीक्षा, रोजगार नहीं मिला तो सब्जी बेच रहा हूं
बदरवास निवासी देवेंद्र भारती ने बताया कि वह एमए पास हैं और उन्होंने बीएड भी किया है। संविदा शिक्षक बनने के लिए पात्रता परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली। 2018 में जब यह परीक्षा दी थी तब सोचा था दो-तीन महीने में वह शिक्षक बन जाएंगे और रोजगार हासिल हो जाएगा जिससे आमदनी का जरिया बनेगा, लेकिन 3 साल पूरे हो जाने के बाद आज तक नौकरी नहीं मिली। नौकरी तो छोड़ो अभी भी दस्तावेज का सत्यापन ही हो रहा है। ऐसे में कोरोना लगने के बाद जब प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने की नौकरी छूटी तो खाने के लाले पड़ गए। ऐसे में हमने सब्जी का ठेला लगाकर अपना जीवन यापन करना शुरू किया है। अभी भी हम सब्जी का ठेला लगाकर ही अपना रोजगार चला रहे हैं।
गांव में पिताजी की जमीन पर हल चलाकर रोजी रोटी चला रहे हैं
दस्तावेज का सत्यापन कराने आए पिपरोदा उबारी के जगराम जाटव ने बताया कि बड़ी उम्मीद से शिक्षक बनने के लिए उन्होंने परीक्षा दी थी। पर अभी भी हम बेरोजगार हैं, पिताजी की जमीन पर खेत जोत कर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। जगराम का कहना था कि जल्द नौकरी उन्हें नहीं मिली तो फिर खेती किसानी से ही उनका रोजगार चलेगा, जो बिना पढ़ाई-लिखाई के भी हो सकता था।
आजाक के स्कूलों में प्रक्रिया चल रही है
अब तक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले स्कूलों की भर्ती के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है, लेकिन आदिम जाति कल्याण विभाग के स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रक्रिया अभी चल रही है। इससे 2 महीने का वक्त और लगने की संभावना है।
जिम्मेदारी से कर रहे काम
दस्तावेज के सत्यापन का काम विभागीय अधिकारी कर रहे हैं, और जो नियमावली शासन से मिली है उसके अनुसार एक सत्र में जिन्होंने 2 डिग्री हासिल की हैं वह इसके पात्र नहीं हैं इसलिए जिन्हें होल्ड पर रखा गया है, वह गलत आरोप लगा रहे हैं। हम अपना काम जिम्मेदारी से कर रहे हैं। आरएस परिहार, जिला संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग शिवपुरी

0 टिप्पणियाँ