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बाढ़ संकट : 6 जिलों के 450 से ज्यादा गांवों में 8 दिन से बिजली नहीं, सौ से ज्यादा सड़कें क्षतिग्रस्त


                      

गांव में बाढ़ का पानी, सड़क पर आए ग्रामीण, यहीं खाना और यहीं सोना

पुल-पुलिया बहने से अंचल के लोगों को लगाना पड़ रहा अतिरिक्त फेरा

 सिंध और चंबल नदी में आई बाढ़ के कारण ग्वालियर-चंबल संभाग के छह जिलों में 450 से अधिक गांव आठ दिन बाद भी अंधेरे में हैं। इन गांवों में बाढ़ का पानी भरने के बाद ट्रांसफार्मरों में पानी भरने और फॉल्ट होने के कारण बिजली गुल हो गई थी। गांव के रास्तों पर पानी भरा होने से अब तक बिजली बहाल नहीं की जा सकी है। बाढ़ से अंचल में सौ से अधिक सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। एक दर्जन छोटे-बड़े पुल बहने से लोगों को अतिरिक्त फेरा लगाकर एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ रहा है।

दतिया जिले में सबसे ज्यादा तीन पुल बहे हैं। इससे सेंवढ़ा का ग्वालियर से सीधा संपर्क कट गया है। अब 60 किमी अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है। यही हाल श्येापुर का है, यहां पर ग्वालियर और शिवपुरी जाने के लिए भी 60 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा। पुल बहने से रतनगढ़ मंदिर तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है। हालांकि अब पानी उतरने से कुछ जगह का रास्ता खुल गया है।

श्योपुर और सवाई माधौपुर के बीच ट्रैफिक चालू हो गया है। मुरैना में 25 जगह चंबल दाहिनी नहर टूट गई है। बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों का मुआयना करने के लिए ग्रामीण विकास प्राधिकरण की सीईओ तन्वी सुंद्रियाल मंगलवार को मुरैना पहुंचीं।

दतिया जिले में कुल 36 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। 8 राहत शिविर चल रहे हैं। अभी किसी भी बाढ़ प्रभावित गांव की बिजली बहाल नहीं हो सकी। सेंवढ़ा के सनकुआं का सिंध स्थित पुल टूट जाने से सेंवढ़ा क्षेत्र के लोगों को ग्वालियर के लिए 60 किमी का फेरा लगाना पड़ रहा है। जिले में लांच,रतनगढ़ मंदिर व सेंवढ़ा के पुल बाढ़ में बह गए हैं। अभी रतनगढ़ मंदिर पर पहुंचना मुश्किल है।

गांव में बाढ़ का पानी, सड़क पर आए ग्रामीण, यहीं खाना और यहीं सोना
श्योपुर से करीब 20 किमी दूर पार्वती नदी किनारे बसे जलालपुरा व झोपड़ी गांव में बाढ़ का पानी भरा है। लोगों के मकान टूट चुके हैं। इसलिए लोग रहने के लिए सड़कों पर आ गए हैं। यहीं पर अस्थायी आशियाने बना लिए हैं। लोगों का खाना भी अब सड़कों पर ही बन रहा है।

श्योपुर: ग्वालियर-शिवपुरी के लिए 60 किमी का फेरा
जिले में 150 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन का दावा है कि जिले में 11 राहत शिविर चल रहे हैं। बाढ़ग्रस्त गांवों की बिजली अब तक बहाल नहीं हो पाई है। शिवपुरी-ग्वालियर को श्योपुर से जोड़ने वाला कूनो नदी का पुल का स्लैब बह चुका है। ऐसे में लोगों को वीरपुर-टेंटर से मुरैना होते हुए ग्वालियर तो विजयपुर होते हुए शिवपुरी जाना पड़ रहा है। इन दोनों ही सफर को तय करने के लिए 60 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है। मानपुर-ढोढर को जोड़ने वाला पुल भी अभी क्षतिग्रस्त है।

शिवपुरी: 23 गांव अति प्रभावित, 25 सड़कें क्षतिग्रस्त
शिवपुरी जिले में 514 गांव अतिवृष्टि व बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें से अति प्रभावित 23 गांव हैं। जिले में करीब 125 गांवों में बिजली बहाल नहीं हो सकी है। मगरौनी, कांकर व सीहौर सब स्टेशन अभी भी बंद हैं। 12 करोड़ से अधिक का नुकसान आंका जा रहा है। बाढ़ से अधिकतर पुल-पुलिया की एप्रोच बह गईं हैं। करीब 20-25 सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं हैं। एप्रोच में मिट्‌टी भरवाकर अधिकांश रास्ते खोले जा रहे हैं। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पंचायतों के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की गई है।

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट- सड़क की जगह अब चार फीट का दलदल, सेंवढ़ा नगर से 2 किमी दूर फिर भी 7 दिन में नहीं पहुंची मदद
रमाशंकर नगरिया| सेंवढ़ा (दतिया)

दतिया जिले के सेंवढ़ा नगर से महज दो किमी दूर तीन सौ की आबादी वाले कंदरपुरा गांव में बाढ़ का पानी तो उतर गया है लेकिन अब गुस्सा उफान पर है। नगर से सबसे नजदीक होने के बाद भी यहां पर सरकारी अमला न तो राहत पहुंचाने के लिए आया और न ही नुकसान का सर्वे करने। 80 घरों वाले इस गांव में 14 मकान पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं और शेष घरों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं।

मंगलवार को इस गांव के लिए दैनिक भास्कर की टीम रवाना हुई। गांव की जो मुख्य सड़क सीमेंट-कांक्रीट से बनी थी, वहां अब तीन से चार फीट का दल-दल हो गया है। जैसे-तैसे पैदल इस गांव में पहुंचे तो लोग नुकसान का सर्वे करने वाले कर्मचारी समझकर अपनी पीड़ा बयां करने लगे। कोई अपने मकान नष्ट होने की बात कहने लगा तो कोई मलबे में दबी गृहस्थी के बारे में बताने लगा। भास्कर टीम ने उन्हें बताया कि वे सरकारी मुलाजिम नहीं हैं, बल्कि दैनिक भास्कर की टीम है, जो आपके गांव की जमीन हकीकत जानने आई है।

70 वर्षीय रामसेवक मिश्रा फर्श के टुकड़े बीनते हुए बोले कि पौर, आंगन, कमरे सभी नमी के कारण धंसक चुके हैं। दिन में कई बार दीवारों के हिस्से दरके हैं। डर के कारण मकान में नहीं सो पाते। घर की महिलाओं और बच्चों को रिश्तेदारी में भेज दिया है। खुद घर के बाहर सोते हैं। अब घर को बचाने के लिए इसे गिराना होगा लेकिन प्रशासन अभी तक सर्वे करने नहीं आया। इसलिए कुछ कर नहीं पा रहे।

40 वर्षीय नरेश प्रजापति घर के अंदर दलदल को साफ कर रहे हैं। वे कहते हैं पीएम आवास योजना के तहत दो किस्तें मिल चुकी थी। पूरा घर बनकर तैयार हो गया था। सोचा था कि जीवन का एक बड़ा काम पूरा हो गया लेकिन क्या पता था कि बाढ़ फिर पुराने दिनों में लौटा देगी। शेष|पेज 7 पर

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