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शिवपुरी : मंडी में आने वाले माल पर टैक्स चोरी का आरोप लगाया, इसी वजह से पड़ रहे वेतन के लालेे

 

कृषि उपज मंडी समिति शिवपुरी के कर्मचारी वेतन नहीं मिलने से खासे नाराज हैं। मंडी के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का कहना है कि कृषि मंत्री से लिखित शिकायत की थी, जिसका कोई फायदा नहीं हुआ। क्योंकि मंडी बोर्ड ने शिवपुरी मंडी में मंडी टैक्स चोरी को लेकर जांच तक नहीं कराई। मंडी कर्मचारियों के खुलकर सामने आने से शिवपुरी मंडी में टैक्स चोरी खुलकर सामने आ गई है। मंडी सचिव, भार साधक अधिकारी और संयुक्त संचालक मंडी बोर्ड भोपाल द्वारा अनदेखी करने से किसानों का भी शिवपुरी अनाज मंडी से मोह भंग होता दिख रहा है।

वेतन नहीं मिलने से मंडी के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने कृषि मंत्री कमल पटेल से 9 जून को लिखित शिकायत की थी। कर्मचारियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि कृषि उपज मंडी समिति शिवपुरी में प्याज व गल्ला की बेशुमार आवक होने के बाद भी हमें वेतन नहीं मिल रहा है।

न ही छह-सात महीने की भविष्य निधि भेजी गई। सचिव पर सीधे तौर पर आरोप लगाए कि वेतन भत्ते मांगने पर धमकी मिलती है कि नौकरी करना है तो करो, नहीं तो अन्य जगह भेज दिया जाएगा। जुलाई का वेतन आज तक नहीं मिला है, अगस्त भी निकलने जा रहा है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का कहना है कि हम बगैर वेतन के कैसे अपना गुजारा करेंगे।

तीन हजार बोरी गल्ला व 500 से 800 ट्रॉली प्याज की आवक थी : कर्मचारियों की जून में भेजी शिकायत के अनुसार शिवपुरी गल्ला मंडी में उस समय 3 हजार बोरी गल्ला और 500 से 800 ट्रॉली प्याज की आवक हो रही थी, लेकिन मंडी शुल्क वसूली न के बराबर हुई। पूर्व में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने वेतन मांगा तो उसे पिपरई मंडी अटैच कर दिया।

बता दें कि गलत लाइसेंस बनाने की अनुशंसा नहीं करने वाले बाबू ललित चौधरी को कुछ दिन पहले ही संयुक्त संचालक ने पिपरई मंडी अटैच कर दिया। यानी गलत काम करने वालों पर मंडी बोर्ड के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते और सही काम करते हैं तो उनको अटैच कर दूसरी जगह भेज देते हैं।

व्यापारी के बेटे के गलत लाइसेंस में सीधे फंसे, फिर भी बोर्ड ने कार्रवाई नहीं की
शिवपुरी मंडी में भावांतर घोटाले में सब्जी व्यापारी भागीरथ कुशवाह पर 18 लाख रु. की रिकवरी निकली है। लाइसेंस निलंबित होते हुए भी उसके बेटे सत्यम कुशवाह का लाइसेंस जारी कर दिया। मामले में सचिव आरपी सिंह व बाबू एसएम जायसवाल के खिलाफ मंडी बोर्ड ने क्या कार्रवाई की है, इसे लेकर भी लोग सवाल उठाने लगे हैं। फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद कार्रवाई नहीं होने से जिले में मंडी बोर्ड की छवि धूमिल हो रही है।

अब संयुक्त संचालक भी फोन नहीं उठाते
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने और उनके द्वारा मंडी टैक्स चोरी के आरोप को लेकर मंडी सचिव आरपी सिंह को फोन लगाया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। उसके बाद संयुक्त संचालक ग्वालियर हरिराम लहारिया से भी संपर्क किया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अपने ही कर्मचारियों के आरोप को लेकर जिम्मेदार अधिकारी बचने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

उठा सवाल: दो साल में मंडी को लाखों रुपए की इनकम, फिर भी खजाना खाली क्यों ?
वेतन के लाले पड़ने पर सवाल उठ रहा है कि लाखों की आय के बाद पैसा कहां गायब हो गया, जबकि शिवपुरी गल्ला मंडी में साल 2020-21 में लाखों की आय हुई है। पिपरसमा मंडी में प्लाॅट नीलामी में ही 80 लाख से अधिक मिले। पिछले साल समर्थन मूल्य खरीदी का 80-90 लाख रु. आया था, जबकि नियमित गल्ला व सब्जियों से मंडी टैक्स भी आता है। जिला मुख्यालय की मंडी कंगाल कैसे हुई, इसकी हकीकत के लिए आरटीआई के तहत जानकारी मांगी है, ताकि फर्जीवाड़ा लोगों के सामने आ सके।

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