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अधूरी रह गई ग्वालियर की प्यास:122 में से 63 दिन ही बरसे बादल लगातार दूसरे साल कोटा पूरा नहीं



ग्वालियर  मानसून सीजन गुरुवार को खत्म हो गया। हालांकि अभी मानसून की विदाई नहीं हुई है। मानसून सीजन के 122 दिन में ग्वालियर में 63 दिन ही शहर में बादल बरसे हैं। इन 63 दिन में 689.6 मिमी बारिश हुई है। जबकि शहर का औसत बारिश का कोटा 725.6 मिमी है। इस तरह इस साल औसत बारिश के कोटे से मानसून सीजन में 36 मिमी बारिश कम हुई।

लगातार दूसरे साल शहर का औसत बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है। पिछले वर्ष मानसून सीजन में 55 दिन में 517.6 मिमी बादल बरसे थे। मौसम विभाग के अनुसार मानसून सीजन का आखिरी दिन गुरुवार को जरूर था लेकिन मानसून की विदाई अक्टूबर के दूसरे सप्ताह के शुरू में होगी। इस दौरान अंचल में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने की संभावना बनी हुई है।

केवल जुलाई में औसत कोटे से ज्यादा हुई बारिश

जून, अगस्त और सितंबर में शहर में औसत कोटे से बारिश कम हुई। इसी से बारिश में पिछड़ गए हैं। मानसून ने तय समय से एक सप्ताह पहले 19 जून को दस्तक दी थी। एक माह तक बंगाल की खाड़ी में कोई सिस्टम सक्रिय नहीं हुआ। इससे अंचल में मानसून आने के एक माह तक बारिश का लोग इंतजार करते रहे। 18 जुलाई से शहर में बारिश का सिलिसला शुरू हुआ। केवल जुलाई में औसत कोटे से ज्यादा बारिश हुई है।

अंचल में अभी बारिश होने की उम्मीद बनी हुई है

अंचल से मानसून की विदाई अक्टूबर के दूसरे सप्ताह के शुरुआत में होने की संभावना है। मानसून की विदाई राजस्थान के रास्ते होगी। अभी ग्वालियर, भिंड और दतिया में गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने की संभावना है। जबकि शेष जिलों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है।

इसके साथ ही पूर्वोत्तर अरब सागर के ऊपर सक्रिय अतिनिम्न दाब क्षेत्र निम्न दाब क्षेत्र में प्रभावशाली होने के बाद चक्रवातीय तूफान शाहीन में तब्दील हो सकता है। हालांकि इसका अंचल में कोई असर नहीं होगा।
-वेद प्रकाश सिंह, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक

 

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