शिवपुरी जन-कल्याण और सुराज अभियान के तहत आज महिला स्व सहायता समूह को ऋण वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए कि किस प्रकार उन्होंने समूह से जुड़कर छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियां शुरू की और आज आत्मनिर्भर होकर काम कर रहीं हैं। इन्हीं में से एक हैं नोहरीकला निवासी श्रीमती किशोरी रावत।
विकासखण्ड शिवपुरी के ग्राम नोहरीकलां निवासी श्रीमती किशोरी रावत ने बताया कि मैं बचपन से ही अपने पैरो पर खड़ा होना चाहती थी। 13 साल की उम्र में शादी कर दी गई। ससुराल में आकर पढ़ने की इच्छा जाहिर की तब कहा कि पढ़ लिखकर क्या मैडम बनोगी। बच्चों के पालन पोषण में सपने पीछे छूट गए।लेकिन जब आजीविका मिशन वाले हमारे गांव में आए और उन्होंने बताया कि महिलाए आजीविका मिशन से जुडे। उन्हें इससे बहुत काम मिलेगा, तो गांव की अन्य महिलाओं के साथ मैं भी इस मिशन से जुड गयी और गणवेश की सिलाई कर कुछ रुपए कमाए और आगे स्वयं का कछ काम शुरू करने की इच्छा जाहिर की।किशोरी रावत का कहना है कि घरवालों के सहयोग से उन्होंने दुकान खोली। शुरुआत के 3 दिन तो दुकान नहीं चली, लेकिन चौथे दिन जब 40 रूपये की बिक्री हुई, जिससे मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि यह मेरी मेहनत की कमाई थी। तब सोचा कि आज 40 रुपये कमाए हैं आगे 40 हजार भी कमाऊंगी। धीरे धीरे जब शादी और त्योहार के समय पर दुकान चलने लगी, तब 40 हजार रुपये भी कमाए। पूरे घर परिवार ने भी मुझे सहयोग किया। आज उस दुकान के माध्यम से मैं 2 से 2.50 लाख रूपए कमा रही हूं। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर होकर काम कर रही हैं। समूह की गतिविधियां महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है
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