ग्वालियर महात्मा गांधी की जयंती पर हिंदू महासभा ने विचार गोष्ठी रखी है। इसमें सिर्फ महात्मा गांधी ही नहीं, नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के व्यक्तित्व पर विचार गोष्ठी होगी। इसके बाद युवा खुद तय करेंगे कि कौन सही था, कौन गलत?
हिंदू महासभा के भवन दौलतगंज में विचार गोष्ठी रखी गई है। अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज ने बताया कि महासभा भवन में महात्मा गांधी, नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के बारे में विचार गोष्ठी में वक्ता विचार रखेंगे। इसमें हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष लोकेश शर्मा, जिला महामंत्री मोहन सिंह बघेले सहित युवा वक्ता विचार रखेंगे। महासभा का कहना है कि हमारा मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा लोग गोडसे को ठीक से जान पाएं।
अभी नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को सिर्फ गांधी के हत्या करने वाले के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इसके माध्यम से यह भी बताने का प्रयास किया जाएगा कि आखिरकार गोडसे को क्यों यह कदम उठाना पड़ा।
गांधी का गोडसे और गोडसे का ग्वालियर कनेक्शन
जब भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बात चलेगी, तो नाथूराम गोडसे का जिक्र जरूर होगा। जब नाथूराम गोडसे का जिक्र होगा तो ग्वालियर का जिक्र होना भी तय है, क्योंकि की गांधी की हत्या से पहले 3 दिन नाथूराम गोड़से ने ग्वालियर के दौलतगंज स्थित अखिल भारतीय हिंदू महासभा भवन में ही गुजारे थे।
पास ही एक दुकान पर वह सुबह का नाश्ता करते थे। दोपहर में जगदीश अष्ठाना उनके खाने का इंतजाम करते थे। गांधी जी की हत्या में उपयोग की जाने वाली रिवॉल्वर ग्वालियर से ही उपलब्ध कराई गई थी। ग्वालियर हिंदू महासभा का गढ़ रहा है।
स्वर्ण रेखा नदी के किनारे गोली चलाने का किया अभ्यास
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज ने बताया कि गांधीजी की हत्या से पहले तीन दिन तक नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे ने ग्वालियर में स्वर्ण रेखा नदी किनारे लगातार रिवॉल्वर से गोली चलाकर सटीक निशाना लगाने का अभ्यास किया था। विचार गोष्ठी में महात्मा गांधी की नीति और उसके साथ ही नाथूराम गोडसे और प्रोफेसर नारायण आप्टे के बारे में विचार रखे जाएंगे।
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