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गरीब बच्चों का पढ़ने और पहनने का ध्यान रखने के साथ रोज हेल्थ चेकअप भी कराते हैं



 ग्वालियर झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले जिन बच्चों के दिन की शुरुआत भीख मांगने, पन्नी और कबाड़ बीनने से होती थी, वे अब हर रोज नियमित रूप से विद्यालय जा रहे हैं। बच्चों के जीवन में यह बदलाव आया है समाजसेवी दीपेश उर्फ दीपक श्रीवास्तव के प्रयासों से। बच्चे स्वस्थ रहे, इसके लिए भी दीपेश समय-समय पर नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाते हैं।

प्रीतम विहार कॉलोनी निवासी दीपेश बताते हैं कि झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग अपने बच्चों का स्कूल में प्रवेश तो करा देते हैं, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के चलते वे उन्हें नियमित स्कूल नहीं भेज पाते हैं। माता-पिता जब मजदूरी पर चले जाते हैं तो बच्चे पन्नी और कबाड़ बीनने जैसे कामों में लग जाते हैं।

हमने ऐसे बच्चों को चिह्नित कर उन्हें स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके लिए उन्हें कॉपी, किताबें और कपड़े बांटे। इसके बाद उनके माता-पिता की काउंसिलिंग भी की। इसका परिणाम यह हुआ कि अब झुग्गी-झोपड़ी व रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले बच्चे स्कूल जाने लगे हैं।

160 बच्चों को दे रहे नि:शुल्क शिक्षा और रोजगार का प्रशिक्षण
दीपेश स्लम बच्चों के लिए शहीद गेट गोपाल बाग मुरार में एक ओडीआई सेंटर भी संचालित कर रहे हैं। इसमें 5 से 14 साल के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाई करा रहे हैं। वर्तमान में करीब 95 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अलावा 15 से 20 साल के करीब 65 यवक-युवतियों को स्वावलंबी बनाने के लिए विभिन्न स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें सिलाई, कढ़ाई, मेंहदी, ब्यूटी पार्लर एवं कम्प्यूटर की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
संस्था इन युवक-युवतियों को प्रशिक्षण देने के बाद रोजगार दिलाने का भी प्रयास करती है।इसके साथ ही बच्चों को साहित्य, संगीत व कला आदि से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ने के लिए भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अहिंसा महिला बाल कल्याण स्वास्थ्य शिक्षा समिति के माध्यम से दीपेश से कई अन्य लोग भी जुड़ गए हैं, जो उनकी हर काम मदद करते हैं। इनमें नीता शर्मा, नेमीचंद झा, अमित शर्मा, भावना तोमर और खुशी तिवारी आदि शामिल हैं।

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