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MP : एनडीपीएस एक्‍ट के अपराध में जब्त वाहन की अंतरिम कस्टडी देने पर कोई रोक नहीं ,हाइकोर्ट ग्वालियर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ग्‍वालियर के जस्टिस दीपक कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने आगे कहा कि एनडीपीएस अधिनियम में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 52 सी में निहित अंतरिम कस्टडी देने के संबंध में कोई रोक नहीं है। पीठ ने कहा कि केवल इस आधार पर कि वाहन एनडीपीएस अधिनियम की धारा 60 के तहत जब्त हुआ है, यह नहीं माना जा सकता कि एक बार वाहन को एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराध के लिए जब्त कर लिया जाये तो उसे अंतरिम कस्टडी में नहीं दिया जा सकता। भले ही एनडीपीएस अधिनियम की धारा 60 अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध के कमीशन में शामिल वाहन को जब्त करने का प्रावधान करती है, लेकिन यह किसी भी वाहन (अपराध के कमीशन में पाए गए) को ज़ब्त करने के फौरन बाद उसे कब्ज़े में लेने का प्रावधान नहीं करती। अदालत ने आगे समझाया, "जब्ती एक अलग प्रक्रिया है जो दोषसिद्धि या आरोपी को बरी करने से संबंधित नहीं है। यह केवल अदालत की संतुष्टि है जो अधिनियम के तहत यह तय करने की कोशिश कर रही है कि वाहन जब्त करने योग्य है या नहीं है। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 60 के तहत जब्ती करने के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया एनडीपीएस अधिनियम की धारा 63 में दी गई है।"
संक्षेप में मामला यह था कि याचिकाकर्ता कार का पंजीकृत स्‍वामी है जिसे एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8/20 के तहत दंडनीय अपराध के कमीशन में शामिल पाया गया था। याचिकाकर्ता ने आरपीसी की धारा 457 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, मुरैना के समक्ष वाहन की अंतरिम कस्टडी हेतु आवेदन प्रस्‍तुत किया, जिसे खारिज किया गया। इसके पश्‍चात याचिकाकर्ता ने  अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष एक पुनर्विचार दायर की जिसे यह कहते हुए भी खारिज कर दिया गया कि चूंकि विचाराधीन वाहन एनडीपीएस अधिनियम की धारा 60 के तहत जब्त कर लिया है, इसलिए उसे अंतरिम कस्टडी में नहीं दिया जा सकता।

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