आइए हम एक शिवपुरी में होली के त्यौहार पर घटित घटना को बताते हैं
शिवपुरी : सिटी कोतवाली क्षैत्र अंतर्गत लक्ष्मी बाई रोड पर प्रज्ञा बाल मंदिर स्कूल के सामने पानी प्लांट पर नशे में धुत लोगो ने जमकर गाली-गलौज की कॉलोनी में शोर-शराबा होते देख घरों से कॉलोनी के लोग बाहर आए तो उन लोगों से भी गाली गलौज करना स्टार्ट कर दिया नशे में धुत लोगों ने कॉलोनी निवासियों पर जमकर पत्थर बरसाए और पानी प्लांट पर लगे कैमरा को थोड़ा फोड़ की जिससे उनकी रिकॉर्डिंग ना हो सके कॉलोनी के लोगों ने पुलिस को फोन लाएगा और जानकारी दी की कुछ नसेलची बदमाश किस्म के लोग कॉलोनी मैं उत्पाद कर रहे है जब पुलिस मैके पर पहुची और कॉलोनी के ही लोगो को उठा कर बंद कर दिया ?
और उग्र लोगो को मोके पर छोड़ दिया क्यों की उग्र लोग मुस्लिम धर्म से आते है शायद पुलिस को डर था कहीं हिन्दू मुस्लिम दंगा ना छिड़ जाऐ इसलिए उल्टा फैक्ट्री संचालक और कॉलोनी निवासियों पर ही मुकदमा इन धाराओं 294 323 506 के साथ दर्ज कर दिया जब पुलिस की समझ में आया कि यहा तो " दा कश्मीर फाईल" मूवी की तरहा हो रहा है फिर आनन-फानन में सिटी कोतवाली पुलिस ने मुस्लिम समाज के कुछ लोगों पर एफ आई आर(FIR) की और एक व्यक्ति को पकड़ कर बैठा लिया और हमेशा कि तरहा पुलिस प्रक्रिया कार्रवाई चलती रही
विचारणीय विंदु
" इसी पुलिस प्रकिया के कारणों से कभी कभी दंगा फैलता है क्यों की उग्र शिर्फ उग्र होते है उन का कोई जाति या धर्म से सरोकार नही होता यह भी अटल सत्य है और सभी को समझना भी चाहिए "
क्यो कि यह भी एक ऐसी ही घटना थी
उस उग्र लोगों ने घर बैठे लोगों पर पत्थर बरसाए और दोनों पक्षों पर (FIR) हुई
आखिर
पुलिस क्या दर्शाना चाहती है ?
सामाजिक मंथन , संवेदना
- कहीं ना कहीं उग्र लोगो को प्रोत्साहन मिला क्योंकि घर बैठे लोगों पर उग्र व्यक्ति ने पत्थर भी बरसाए, गालियां दी और कायमी (FIR) भी घर बैठे लोगों पर हुई
अफसोस ----------
किसी भी जाति धर्म का साधारण व्यक्ति कहाँ जाऐ और उग्र लोगों से कैसे छुटकारा मिले ?
मानवता पर हो रहे अत्याचार को
मध्य प्रदेश शासन विचार करे ?
पुलिस हमेशा --निर्दोषों के साथ निर्दोष वाला
व्यवहार , उग्र लोगों के साथ उग्र जैसा व्यवहार करें
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