शहीद मेला के दौरान 18 अप्रैल को श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई और शाम को देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति भोपाल से आए कलाकारों द्वारा दी गई। 19 अप्रैल को विदिशा के लोक कलाकारों ने लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि इंजी. अवधेश सक्सेना अवधेश ने की। जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव, नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मंच संचालन आदित्य शिवपुरी ने किया।
कवि सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकार कवि इंजी. अवधेश सक्सेना ’अवधेश’, वरिष्ठ साहित्यकार नाटककार दिनेश वशिष्ठ, राजकुमार चौहान भारतीय, अजय जैन अविराम, शरद गोस्वामी शिखर, अजय गौतम, सौरभ तिवारी सरस (करेरा) एवं आदित्य शिवपुरी ने रचना पाठ किया।
अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए अवधेश ने ग़ज़ल सुनाई वतन के वास्ते जो हो उसे ही प्यार मानूंगा, शहीदों के शहादत दिन बड़े त्योहार मानूंगा। दिनेश वशिष्ठ की पंक्तियां देखें सुकुने दिल की तबाही से हिफाजत करना, कभी किसी से तहे दिल से प्यार मत करना, राजकुमार चौहान की हास्य रचना थी कांधे पर लट्ठ धरो भैय्या, अजय जैन अविराम की प्रस्तुति देखिए देकर साँसे, बलिदान विधि से बना तिरंगा। करें प्रथम, बस देश नमन, गहें तिरंगा। शरद गोस्वामी ने सुनाया फकत इतनी कहानी है ये दिल हिन्दुस्तानी है, मेरी हर सांस में भारत मेरे एहसास में भारत मेरे पुरखों की भारत में बड़ी लंबी कहानी है। अजय गौतम एडवोकेट ने तिरंगे की शान में अपनी रचना सुनाई मैं तिरंगा हूं, रक्त सिंधु मेरे आंचल में रोज उफनते हैं, मेरी छाया में सोने को सिंह मचलते हैं।
सौरभ तिवारी सरस की पंक्तियां थीं गीत का कर आचमन, सब शब्द सुन्दर हो गए, कोष के छोटे सरोबर, ज्यूँ समन्दर हो गए। मंच संचालन कर रहे आदित्य शिवपुरी ने शेर सुनाए तआब उनकी जला भी सकती है, किससे नज़रें मिला रहा हूं मैं, इससे पहले नहीं सुना होगा, ये जो क़िस्सा सुना रहा हूं मैं।
नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती गायत्री शर्मा, जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के नोडल अधिकारी वीरेंद्र धाकड़ एवं जिला शहरी विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी सौरभ गौड़ ने कवियों का सम्मान किया।

0 टिप्पणियाँ