रूस के हाथ आए उत्तर कोरिया के हथियार
क्या जानकारियां सामने आईं?
जनवरी, 2024 में यूक्रेन के खारकीएव से बरामद मिसाइल का मलबा. जानकारों का कहना है कि यह मिसाइल उत्तर कोरिया में बनी थी.
इन मिसाइलों में नवीनतम विदेशी तक़नीक का भरपूर इस्तेमाल किया गया था. पिछले कुछ सालों में अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक हिस्से का निर्माण अमेरिका और यूरोप में किया गया है.
इसका मतलब था कि उत्तर कोरिया ने अवैध रूप से हथियार के महत्वपूर्ण हिस्से ख़रीदे, उसे छुपाकर देश में लाया, यहां उन हिस्सों को इकट्ठा कर मिसाइल बनाए और इसे गुप्त रूप से रूस रवाना कर दिया. रूस से इन मिसाइलों को सीधा फ्रंटलाइन पर भेज दिया गया और फिर ये वहां से दाग दी गईं.
ये सब बस कुछ ही महीनों में अंजाम दिया गया.
सीएआर के सह निदेशक डेमियन स्प्लिटर्स ने कहा, ''ये सबसे चौंकाने वाली बात थी कि लगभग दो दशकों से कड़े प्रतिबंधों का सामना करने के बावजूद, उत्तर कोरिया अभी भी अपने हथियार बनाने के लिए ज़रूरी सभी चीजें हासिल करने में कामयाब रहा है, वो भी असाधारण गति से.''
लंदन में रक्षा थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (आरयूएसआई) के उत्तर कोरिया विशेषज्ञ जोसेफ़ बर्न भी इन जानकारियों से उतने ही हैरान हैं.
उन्होंने कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यूरोप की ज़मीन पर लोगों को निशाना बनाने के लिए उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल होते देखूंगा."
क्रिस्टीना किमचुक एक युवा यूक्रेनी हथियार इंस्पेक्टर हैं.
बीते दो जनवरी को उन्हें सूचना मिली कि ख़ारकीएव में एक असामान्य सी दिखने वाली मिसाइल गिरी है और इसकी चपेट में आने से एक इमारत क्षतिग्रस्त हो गई है.
इसके बाद आनन-फ़ानन में उन्होंने यूक्रेनी सेना में मौजूद अपने परिचितों को फ़ोन घुमाना शुरू कर दिया, ताकि इस बारे में जानकारी जुटाई जा सके.
एक हफ़्ते के भीतर ही राजधानी कीएव के एक सुरक्षित ठिकाने पर उन्हें मलबा गिरा नज़र आया.
उन्होंने इन मलबों को अलग करना शुरू कर दिया और स्क्रू से लेकर नाख़ून से भी छोटे आकार के कंप्यूटर चिप्स सहित हर हिस्से की तस्वीर खींचनी शुरू कर दी.
इन तस्वीरों को देखते हुए उन्हें तुरंत ही ये अंदाज़ा हो गया था कि ये किसी रूसी मिसाइल का मलबा नहीं है, लेकिन इसको साबित करना उनके लिए एक चुनौती थी.
उत्तर कोरिया में कब बनी थी मिसाइल
मलबे में मौजूद धातु और उलझे हुए तारों के बीच किमाचुक को कोरियाई वर्णमाला का एक छोटा अक्षर नज़र आया.
.फिर उन्हें मलबे के कुछ बाहरी हिस्सों पर '112' छपा हुआ दिखा. उत्तर कोरिया के ज्यूक कैलेंडर के मुताबिक़ इसका मतलब साल 2023 है.
ये देखने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके देश पर हमला करने के लिए उत्तर कोरियाई हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है और ये इस बात का ठोस सबूत है.
कीएव से फ़ोन पर बातचीत में उन्होंने मुझे बताया, ''हमने सुना था कि उन्होंने रूस को कुछ हथियार पहुंचाए हैं, लेकिन मैं इसे देख सकती हूं, छू सकती हूं, इसकी जांच कर सकती हूं. ऐसे जैसे पहले किसी ने नहीं किया. यह बहुत रोमांचक था."
तब से, यूक्रेनी सेना ने कई मौकों पर ये दावा किया है कि रूस ने उनके क्षेत्र में दर्जनों उत्तर कोरियाई मिसाइलें दागी हैं. इन हमलों में कम से कम 24 लोगों की जान गई है और 70 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
किम जोंग उन और उनके परमाणु युद्ध शुरू करने की तैयारियों पर हो रही हालिया चर्चाओं के बीच फिलहाल सबसे तात्कालिक ख़तरा जो है, वो उसकी मौजूदा युद्धों को भड़काने और वैश्विक अस्थिरता को बढ़ावा देने की क्षमता है.
किमाचुक कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (सीएआर) के लिए काम करती हैं. ये संगठन युद्ध में इस्तेमाल किए गए हथियारों को बरामद करता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे कैसे बनाए गए थे.
लेकिन इस मामले में सबसे हैरान कर देने वाली जानकारी तब तक सामने नहीं आई थी, जब तक किमाचुक ने मिसाइल के मलबे की पूरी तस्वीरें नहीं खींच ली और उनकी टीम ने इनका विश्लेषण कर लिया.
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