अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका कितनी अहम होती है, इसका एक उदाहरण पोहरी थाना क्षेत्र में देखने को मिला। झिरी निवासी एक युवती द्वारा 16 जुलाई 2024 को छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें प्रदीप कुमार दुबे को आरोपी बनाया गया। युवती का आरोप था कि जब वह आधार कार्ड में सुधार करवाने प्रदीप कुमार के क्योस्क सेंटर पर गई थी। तब प्रदीप ने फोटों खींचने के नाम उसके साथ छेड़छाड़ कर दी थी। लेकिन जब अधिवक्ता विजय शर्मा ने मामले की बारीकी को समझते हुए सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य के रूप में न्यायालय में प्रस्तुत किया, तो प्रदीप कुमार दुबे निर्दोष साबित हो गए। अदालत ने इन पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
अधिवक्ता विजय शर्मा ने रखी मजबूत दलीलें -
मामले में अधिवक्ता विजय शर्मा ने प्रमुखता से केस की बारीकियों को समझा और सीसीटीवी फुटेज की अहमियत को ध्यान में रखते हुए न्यायालय में प्रभावी ढंग से साक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था न होती, तो निर्दोष व्यक्ति को झूठे आरोपों का शिकार होना पड़ सकता था। उनके तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने प्रदीप कुमार दुबे को निर्दोष करार दिया।
एसपी अमन सिंह राठौड़ ने सीसीटीवी की अहमियत बताई -
इस मामले के बाद शिवपुरी एसपी अमन सिंह राठौड़ ने कहा कि "सीसीटीवी कैमरे अपराध नियंत्रण के साथ-साथ न्याय दिलाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि तकनीक के सही इस्तेमाल से निर्दोष को न्याय मिल सकता है और अपराधी पकड़े जा सकते हैं।"
उन्होंने व्यापारियों और आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने प्रतिष्ठानों, घरों और सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे जरूर लगवाएं। इससे न केवल अपराधियों पर नजर रखी जा सकती है, बल्कि किसी भी विवाद या झूठे आरोप से बचाव के लिए पुख्ता प्रमाण भी मिल सकते हैं।

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