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Shivpuri News : पंचायत सचिवों की समस्याओं को लेकर जिला पंचायत सीईओ को सौंपा गया ज्ञापन

 

शिवपुरी। जिले के पंचायत सचिवों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को एक ज्ञापन सौंपा। पंचायत सचिवों ने ज्ञापन में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही कथित प्रताड़ना, निलंबन, वेतन राजसात जैसी कार्रवाईयों पर आपत्ति जताई और इन मामलों में न्यायोचित निर्णय लेने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि पंचायत सचिव पूरी लगन के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ बिना जांच के निलंबन और अधिकार समाप्त करने जैसी कार्यवाही की जा रही है। जनपद पंचायत नरवर की ग्राम पंचायत बेरखेड़ा की महिला सचिव श्रीमती सुनीता रावत का बगैर कारण जिले से संलग्न कर दिया गया, जबकि शिवपुरी और नरवर के सचिवों का वेतन भी बिना सूचना के राजसात कर दिया गया है। पंचायत सचिवों ने मांग की कि निलंबित और अधिकार विहीन सचिवों को तत्काल बहाल किया जाए और इस प्रकार की कार्यवाही की पुनरावृत्ति न हो।

रिक्त पंचायतों में सचिवों को सौंपे जाएं प्रभार

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिले की कई जनपदों में पंचायत सचिवों को संलग्न किया गया है, लेकिन रिक्त पंचायतों में उनके स्थान पर ग्राम रोजगार सहायकों को प्रभार सौंपा जा रहा है। पंचायत सचिवों ने मांग की कि संलग्न सचिवों को रिक्त ग्राम पंचायतों में पदस्थ कर सचिवीय अधिकार प्रदान किए जाएं।

अत्यधिक कार्यभार और मानसिक तनाव का आरोप

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि पंचायत सचिवों पर अत्यधिक कार्य का दबाव बनाया जा रहा है और अवकाश के दिनों में भी उनसे काम लिया जा रहा है। अनुपस्थिति पर वेतन राजसात करने जैसी कार्रवाई से सचिव मानसिक तनाव में हैं। सचिवों ने चेतावनी दी कि यदि इस वजह से किसी सचिव के साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

अनुकंपा नियुक्ति और लंबित वेतन भुगतान की मांग

ज्ञापन में जनपद पंचायत बदरवास के तीन पंचायत सचिवों के लंबित एरियर भुगतान की मांग की गई, साथ ही दिवंगत सचिवों के आश्रितों को दी गई अनुकंपा नियुक्ति की परिवीक्षा अवधि को तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष करने की मांग भी रखी गई।

माह में एक दिन सचिवों की समस्याओं के समाधान के लिए तय हो बैठक

सचिवों ने मांग की कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए माह में एक दिन निश्चित किया जाए, ताकि वे अपनी शिकायतें और सुझाव अधिकारियों के समक्ष रख सकें। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो पंचायत सचिव जिला स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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