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Shivpuri News : पति की 'संदिग्ध मौत' पर शिवपुरी में बवाल: दतिया पुलिस पर रसूखदारों को बचाने का आरोप, बिलखती विधवा ने एसपी ऑफिस में लगाई न्याय की गुहार


शिवपुरी। एक तरफ खाकी 'न्याय' का दम भरती है, तो दूसरी तरफ एक बेबस विधवा के आंसू पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। शिवपुरी की गणेश कॉलोनी (फतेहपुर) निवासी एक महिला मंगलवार को अपने मासूम बच्चों और बुजुर्ग सास के साथ एसपी दफ्तर पहुंची। महिला का आरोप है कि उसके पति की हत्या को 'हादसा' बताकर दतिया पुलिस रसूखदारों को संरक्षण दे रही है।

​क्या है पूरा मामला?

​पीड़िता के पति का शव कुछ समय पहले दतिया जिले के गौराघाट थाना क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। पत्नी का साफ कहना है कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है।

​पीड़िता ने अपनी शिकायत में कुछ स्थानीय प्रभावशालियों के नाम भी उजागर किए हैं, लेकिन पुलिस की जांच की फाइल आगे बढ़ने का नाम नहीं ले रही है।

​"साहब! हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं"

​एसपी ऑफिस में अधिकारियों के सामने अपना दुखड़ा सुनाते हुए महिला फूट-फूटकर रो पड़ी। पीड़िता ने पुलिस पर निम्नलिखित आरोप लगाए हैं:

​राजनीतिक रसूख का दबाव: पीड़िता का दावा है कि आरोपी आर्थिक और सामाजिक रूप से संपन्न हैं, जिसके कारण गौराघाट पुलिस उन पर हाथ डालने से कतरा रही है।

​केस वापसी की धमकियां: आरोप है कि खुलेआम घूम रहे आरोपी अब पीड़िता पर मामला रफा-दफा करने का दबाव बना रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।

​आश्वासन की घुट्टी: शिवपुरी से दतिया तक के चक्कर काटने के बाद भी पुलिस केवल जांच का भरोसा दे रही है, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

​"मेरे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, घर में खाने के लाले पड़े हैं और पुलिस तमाशबीन बनी हुई है। अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो मैं उग्र कदम उठाने को मजबूर होऊंगी।"

— पीड़िता, गणेश कॉलोनी निवासी


​पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल

​दतिया और शिवपुरी पुलिस के बीच उलझा यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ जहां शिवपुरी एसपी कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, वहीं दूसरी तरफ गौराघाट पुलिस की 'चुप्पी' संदेह के घेरे में है।

​अब देखना यह होगा कि क्या वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाते हैं या फिर 'रसूख' के आगे एक बार फिर कानून लाचार नजर आएगा।

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