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सरकार ने हाईकोर्ट में SIT की जांच पर संदेह जताया / मध्य प्रदेश हनी ट्रैप

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भोपाल। यदि रसूखदार भ्रष्ट के साथ-साथ चरित्रहीन भी हो तब भी मध्यप्रदेश में उसके राज छुपे रहेंगे क्योंकि शिवराज सिंह सरकार ऐसे लोगों को संरक्षित करती है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सरकार ने उन 40 से ज्यादा रसूखदार लोगों के मामले में बंद कमरे में सुनवाई का निवेदन किया है जिनके नाम स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने हाई कोर्ट को सौंपे हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार को अपनी एसआईटी की इन्वेस्टिगेशन पर भरोसा नहीं है।

हनीट्रैप में फंसे और आरोपी महिलाओं से कनेक्शन वाले रसूखदारों के नाम की जांच एसआईटी कर रही है। हाईकोर्ट से दिशा निर्देश मिलने के बाद एसआइटी ने जांच की। इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस पर रसूखदारों को बचाने का आरोप भी लगा था। इतना ही नहीं सीबीआई जांच की मांग भी उठी थी। हाल ही में इंदौर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले की जांच कर रही एसआइटी से स्टेटस रिपोर्ट के साथ जांच में सामने आए नामों की सूची मांगी थी। एसआइटी ने 5 दिन पहले बंद लिफाफे में 40 से ज़्यादा रसूखदारों के नामों की सूची सहित स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को सौपीं है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को है।

सरकार को अपनी एसआईटी की जांच पर भरोसा नहीं

कोर्ट में हनीट्रैप मामले में सरकार की तरफ से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने पक्ष रखा। कौरव का कहना था कि आरोपियों ने कई लोगों से बातचीत और मुलाकात की। ऐसे में बिल्कुल जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति का कनेक्शन अपराध से हो। इसलिए इन नामों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले की सुनवाई भी बंद कमरे में करने की मांग की। कौरव की दलील पर कोर्ट ने सरकार की यह मांग स्वीकार कर ली है। हालांकि लिफाफे में बंद नामों की इस पूरे मामले में क्या भूमिका है, इस पर आगे किस तरीके की जांच की जाएगी, यह निर्देश हाईकोर्ट एसआईटी को देगा।vvvvvvvvvvvvvv

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