इंदौर, कोई भी जीव कभी पराया नहीं होता और कोई भी वस्तु कभी अपनी नहीं होती। जीव को परमात्मा ने अनंत सुखों से सम्पन्न् बनाकर भेजा है। वस्तु निष्प्राण और नाशवान होती है। भगवान ने मनुष्य को जन्म देकर मुक्ताकाश प्रदान किया है। यह उसके विवेक पर निर्भर करता है कि वह अपने इस जन्म को कितना सार्थक या निरर्थक बनाता है। धर्म और संस्कृति के सोपान तय कर व्यक्ति अपने जीवन में श्रेष्ठ विचारों के रंग भरकर उसे सुख और आनंदमय बना सकते हैं।
यह बात जयमल संप्रदाय जयसुंदर मुनि महाराज ने जानकी नगर उपाश्रय में कही। वे जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास के समापन अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अमूल्य है। इसका सांसारिक भोग मात्र नहीं है। परमात्मा ने हर किसी को एक लक्ष्य निर्धारित कर भेजा है। हमारे कार्य ऐसे हो जिससे लोगों का हित हो। सभी के कल्याण की भावना ही मनुष्य को परमात्मा के निकट लाती है।
इस अवसर पर शारीरिक दूरी व मास्क के नियम का पालन किया गया। अध्यक्ष अनोपचंद बाफना, जितेंद्र चोपड़ा, नवीन जैन, गजराज बेताला, युवा मंडल के अध्यक्ष कांतिलाल मेहता, मनोज कुशल बाफना, ललित छल्लाणी, सुनील मेहता आदि ने मुनिद्वय के प्रति ऐतिहासिक चातुर्मास के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। चातुर्मास समापन के बाद मुनिद्वय आगामी कुछ दिनों तक शहर के विभिन्न् जैन श्रीसंघों को पावन सानिध्य प्रदान करने के लिए प्रस्थित हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने मुनिद्वय को भावपूर्ण विदाई दी।

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