बहोड़ापुर से 15 साल पहले लापता हुई 16 वर्षीय किशोरी को 61 वर्षीय सब इंस्पेक्टर ने अपने रिटायरमेंट से 21 दिन पहले पश्चिमी बंगाल से ढूंढ निकाला। दो महीने पहले ही सब इंस्पेक्टर को टास्क मिला था। सब इंस्पेक्टर के इस जज्बे को देखकर पुलिस अफसरों ने भी उन्हें शाबासी दी और उन्हें पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है।
दरअसल 2006 में बहोड़ापुर इलाके से 16 वर्षीय किशोरी लापता हुई थी। बहोड़ापुर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया था। परिजनों ने भी अपहरण की आशंका जताई थी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। कई विवेचक बदल गए, कोई उसे नहीं ढूंढ पाया। कुछ सालों बाद उसके परिजन ने भी उसके मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी। मामला पेंडिंग था, कई विवेचकों ने गम्भीरता से पड़ताल भी नहीं की।
बहोड़ापुर थाना प्रभारी अमर सिंह सिकरवार ने बताया कि करीब दो महीने पहले सब इंस्पेक्टर डीआर शर्मा को यह जांच सौंपी। फिर ऑपरेशन मुस्कान के तहत उन्हें उसे ढूंढने की जिम्मेदारी दी गई। एसआई शर्मा पड़ताल में लग गए। 30 अगस्त को उनका रिटायरमेंट है, आखिर कुछ दिन पहले उन्हें उसका सुराग मिल गया। उन्हें पता लग गया कि वह पश्चिम बंगाल के रहने वाले युवक के साथ गई थी। वहां की पुलिस से सम्पर्क किया।
पुष्टि होने के बाद वह खुद पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में पहुंच गए। वहां की पुलिस की मदद से उस तक पहुंच गए। 15 साल पहले लापता हुई किशोरी 31 वर्ष की हो चुकी है। उसके एक बच्चा भी है। रिटायरमेंट के 21 दिन पहले वह उसे लेकर ग्वालियर आए। यहां उसने बताया कि 15 साल पहले बहोड़ापुर इलाके में पश्चिम बंगाल का रहने वाला रजनीश विश्वास नौकरी करने आया था। उसकी दोस्ती हुई और वह उसके साथ चली गई। यहां से जाने के दो साल बाद उसने उससे शादी कर ली। उसके बयान लेने के बाद पति के ही सुपुर्द कर दिया गया।
-अमित सांघी, एसपी
सब इंस्पेक्टर को 5 हजार का नकद पुरस्कार मिलेगा
सब इंस्पेक्टर शर्मा ने इस उम्र में रिटायरमेंट के 21 दिन पहले 15 साल पुराने मामले का निराकरण कर दिया। वह लापता युवती को ढूंढ लाए। यह अच्छा उदाहरण है। इसलिए उन्हें 5 हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।

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