विद्युत व्यवस्था आंगनबाड़ी केन्द्रों की बुनियादी जरूरत है। शासकीय भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाली महिलाओं और बच्चों को ऐसी सुविधा से वंचित करना उनके मौलिक और मानव अधिकारों का उल्लंघन है। सरकार तत्काल शासकीय भवनों में संचालित सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में विद्युत कनेक्शन कराए। यह निर्देश मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार जैन प्रदेश सरकार को दिए।
आयोग अध्यक्ष श्री जैन ने यह भी निर्देश दिए कि इन सभी केन्द्रों में समुचित प्रकाश व्यवस्था के लिए विद्युत उपकरण और पंखों की व्यवस्था भी की जाए। आयोग ने मध्यप्रदेश शासन को यह अनुशंसा करते हुए इस संबंध में की गई कार्रवाई का एक माह में पालन प्रतिवेदन मांगा है। उल्लेखनीय है कि आयोेग अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन और सदस्य मनोहर ममतानी ने मंदसौर जिले के भानपुरा में आंगनबाड़ी केन्द्र का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण में आयोग ने पाया कि आंगनबाड़ी केन्द्र प्राथमिक शाला के शासकीय भवन में संचालित हो रहा है। जहां गर्भवती और धात्री महिलाओं, बच्चों की देखरेख व्यवस्था की गई है। आयोग ने यहां सभी गतिविधियां तय मानकों के अनुसार ही होना पाया। परन्तु केन्द्र में अंधेरा होने की वजह जानने पर वहां मौजूद कर्मचारियों और महिलाओं ने बताया कि केन्द्र में विद्युत की व्यवस्था नहीं है। इसीलिए भवन में लाइट और पंखे नहीं लगे हैं।
कारण पूछने पर वहां मौजूद विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पूरे प्रदेश में जहां-जहां आंगनबाड़ी केन्द्र शासकीय भवनों में संचालित हैं, वहां ऐसे शासकीय भवन में कहीं भी विद्युत व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसके विपरीत जहां आंगनबाड़ी केन्द्र निजी भवनों में या किराए के भवनों में संचालित हैं, वहां लाइट, पंखे की व्यवस्था उपलब्ध है और वहां ऐसे विद्युत उपकरणों के लिए विद्युत उपयोग के बिलों का भी भुगतान विभाग द्वारा ही किया जाता है।
आयोग पदाधिकारियों ने इस विसंगतिपूर्ण व्यवस्था पर गहन चिंता व्यक्त की। जिसे संज्ञान में लेकर इसमें त्वरित सुधार के निर्देश आयोग ने राज्य शासन के मुख्य सचिव तथा महिला और बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव को दिए और एक माह में पूरे प्रदेश में लागू कर इसकी रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए।

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