खबर शिवपुरी जिले से आ रही है जंहा बताय जा रहा है की नगरपालिका के पूर्व और l वर्तमान सीएमओ को भिरस्टाचार में समलित पाए जाने पर वर्तमान सीएमओ इशांक धाकड़, पूर्व सीएमओ शैलेश अवस्थी, सीएमओ केशव सगर को आयुक्त नगरीय प्रशासन ने निलंबित कर दिया है
मिली सूत्रों से जानकारी अनुसार हम आप को बता दे की
पेमेंट देने में कई कमियां पाई गई कई काम या तो अधूरे हैं या शुरू ही नहीं हुए। भुगतान में बड़ी अनियमितताएं मिलीं। कुछ ठेकेदारों को एक-दो माह में भुगतान कर दिया गया। वहीं कई ठेकेदार लंबे समय से भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं। परिषद और पीआईसी की बैठकों में वित्तीय स्थिति की अनदेखी की गई।
कलेक्टर शिवपुरी द्वारा संचालनालय को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2022 से अब तक नगर पालिका शिवपुरी में कुल 743 निर्माण कार्य, जिनकी लागत 57.80 करोड़ रुपये है, या तो अधूरे हैं या शुरू ही नहीं हुए। कई कार्य निविदा प्रक्रिया के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़े हैं। वहीं कुछ पूर्ण कार्यों का भुगतान ठेकेदारों को 4 से 8 माह तक रोका गया, जबकि कुछ को 1–2 माह में ही करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि 11.47 करोड़ रुपये के भुगतान में से 5.09 करोड़ केवल दो फर्मों को दिए गए, जिससे अन्य ठेकेदार लगातार शिकायतें करते रहे।
रिपोर्ट में कहा गया कि नगर पालिका कार्यालय में पारदर्शिता और अनुशासन का अभाव है। मिली सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार 520 प्रकरण लंबित पाए गए, जिनमें से 290 महीनों से एजेंडे में शामिल न होने के कारण अटके रहे। इसी प्रकार, भवन निर्माण स्वीकृति के 55 प्रकरण भी समयसीमा से बाहर लंबित थे। इनमें से कई प्रकरण बिना कारण अधिकारी स्तर पर रोके गए।किये गए कार्यो की करीब 45 फाइलें भी उपलब्ध नहीं मिलीं, जिनके जबाब मांगने पर कोई संतोषजनक जवाब सीएमओ की ओर से नहीं दिया गया।
कलेक्टर शिवपुरी ने अपनी अनुशंसा में कहा कि अगस्त 2022 से अब तक पदस्थ रहे तीनों सीएमओ शैलेष अवस्थी, केशव सिंह सगर और वर्तमान सीएमओ ईशांक धाकड़ ने व्यवस्था सुधारने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए। इससे निकाय में अराजकता और अविश्वास का माहौल बना रहा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नगरपालिका कर्मचारियों में सेवा भावना का अभाव है और वे अपने कार्यों के प्रति उदासीन बने हुए हैं।
उपलब्ध अभिलेखों और कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर नगरीय प्रशासन विभाग ने माना कि वर्तमान सीएमओ ईशांक धाकड़ की कार्यप्रणाली घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और शासन के प्रति निष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।

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