शिवपुरी। कहते हैं कि यदि सरकारी इच्छाशक्ति के साथ मानवीय दृष्टिकोण जुड़ जाए, तो चमत्कार होते देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है शिवपुरी जिला प्रशासन और 'अपना घर आश्रम' की टीम ने। प्रशासन की एक अनूठी और संवेदनशील पहल की बदौलत मानसिक अस्वस्थता के कारण वर्षों पहले अपनों से बिछड़े दो लोगों को उनका परिवार वापस मिल गया है। सालों का लंबा इंतजार जब खत्म हुआ, तो आश्रम परिसर में मौजूद हर शख्स की आंखें खुशी के आंसुओं से नम हो गईं।
तीन साल बाद मिला बिहार के रामप्रवेश को अपना भाई
बिहार के गया जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम विशुनपुरा निवासी श्री रामप्रवेश सिंह मानसिक रूप से विक्षिप्त और निराश्रित अवस्था में घूमते हुए पाए गए थे। उन्हें पहले 'अपना घर आश्रम भरतपुर' और उसके बाद शिवपुरी आश्रम लाया गया था, जहां उनका भरण-पोषण और सेवा की जा रही थी। रामप्रवेश करीब 3 साल पहले अपने हंसते-खेलते परिवार से अचानक बिछड़ गए थे।
तकनीक बनी मददगार:
जिला प्रशासन ने एक सराहनीय पहल करते हुए आश्रम में रह रहे सभी निराश्रितों की पहचान स्थापित करने के लिए उनके बायोमेट्रिक के जरिए पहचान पत्र (आधार कार्ड) बनवाने की प्रक्रिया शुरू की। जब रामप्रवेश के फिंगरप्रिंट सिस्टम में दर्ज किए गए, तो पता चला कि उनका कार्ड पहले ही बन चुका है। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क साधा। पुराने डेटाबेस से उनके बिहार के पते की पुष्टि हुई। प्रशासन और आश्रम प्रबंधन द्वारा सूचना मिलते ही रामप्रवेश के भाई उन्हें लेने तुरंत शिवपुरी आश्रम पहुंचे।
एक दशक (10 वर्ष) का दर्दभरा इंतजार खत्म, उज्जैन के राहुल की हुई घर वापसी
दूसरा मामला और भी अधिक भावुक कर देने वाला है। उज्जैन के रहने वाले श्री राहुल मालवीय पिछले करीब एक दशक (10 वर्ष) से अपने परिवार से बिछड़े हुए थे। वे लंबे समय से 'अपना घर आश्रम' उदयपुर, भरतपुर और वर्तमान में शिवपुरी में रह रहे थे। आश्रम में उन्हें 'प्रभुजी' मानकर उनकी नि:स्वार्थ सेवा की जा रही थी।
राहुल के मामले में भी जिला प्रशासन की मुस्तैदी और बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली ही उनकी घर वापसी का जरिया बनी। पहचान पत्र के माध्यम से जब उनके उज्जैन स्थित परिजनों का पता ठिकाना मिला और उन्हें राहुल के जीवित और सुरक्षित होने की खबर दी गई, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 10 वर्षों के लंबे और कष्टदायी इंतजार के बाद जब परिजनों ने राहुल को गले लगाया, तो वहां मौजूद हर दिल भर आया।
प्रशासन और आश्रम के सेवा भाव की हर ओर सराहना
इस पूरे मामले में शिवपुरी जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और 'अपना घर आश्रम' के सेवा संकल्प की जमकर सराहना हो रही है। आश्रम ने न केवल सालों तक इन बेसहारा लोगों को सहारा दिया, बल्कि प्रशासन के साथ मिलकर इन्हें वापस समाज की मुख्यधारा और इनके असली आशियाने तक पहुंचाया।


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