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सियासी रसूख के आगे झुका प्रशासन: कागजों पर बनी सड़क जमीन पर भूली रास्ता, किसानों के खेतों के बीच से गुजार दी 'ठेकेदार की मनमर्जी'

शिवपुरी जिले के ग्राम छिरेंठा में एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ कागजों पर बनी सरकारी सड़क जमीन पर आते-आते अपना रास्ता ही भूल गई। आरोप है कि एक बड़े राजनैतिक रसूखदार को फायदा पहुँचाने के लिए ठेकेदार ने बरसों पुराने परंपरागत सरकारी रास्ते को ही गायब कर दिया और सड़क को सीधे सीधे सीधे भोले-भाले किसानों के खेतों के बीच से निकाल दिया। इस मनमानी के खिलाफ न्याय की गुहार लेकर आज मंगलवार को दोपहर 2 बजे पीड़ित किसान कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुँचे और जिलाधीश के सामने अपना दुखड़ा रोया।

ग्राम छिरेंठा निवासी पीड़ित किसान विजय सिंह पुत्र रघुनंदन गड़रिया ने बताया कि ग्राम पंचायत ईटमा के अंतर्गत पिपरसमा से छिरेंठा तक जाने के लिए सरकारी सर्वे क्रमांक 161 में बरसों पुराना पारंपरिक रास्ता दर्ज था। ग्रामीण इसी रास्ते से आते-जाते थे। लेकिन जब सड़क निर्माण का वक्त आया, तो तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष रिषिका अष्ठाना के पति अनुराग अष्ठाना के राजनैतिक दबाव के आगे नियम-कायदे बौने साबित हो गए। आरोप है कि अष्ठाना की जमीन सर्वे क्रमांक 159, 162 और 165 के पास थी, जहाँ से यह पुराना रास्ता गुजरता था। अपने रसूख का इस्तेमाल कर उन्होंने ठेकेदार से सांठगांठ की और पुराने रास्ते को बंद करवाकर उसे अपने खेत में मिला लिया और वहाँ खेती शुरू कर दी।

ठेकेदार ने रसूखदार के इशारे पर नया रास्ता सर्वे क्रमांक 159 और 150 के बीच से निकाल दिया। इस मनमानी का खामियाजा अब क्षेत्र के दर्जनों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बीच खेत से सड़क निकलने के कारण सर्वे क्रमांक 160 के किसानों के उपजाऊ खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। इतना ही नहीं, ठेकेदार की मेहरबानी यहीं खत्म नहीं हुई। सड़क के बीच बनी पुलिया में पानी निकासी के लिए पाइप तक नहीं डाले गए, ताकि रसूखदार के खेत में पानी न भरे। नतीजा यह हुआ कि बारिश का पूरा पानी दूसरे गरीब किसानों के खेतों को जलमग्न करने लगा। आखिरकार परेशान होकर किसानों को अपने खुद के खर्च से प्लास्टिक के पाइप डालकर पानी की निकासी का इंतजाम करना पड़ा।

हैरानी की बात यह है कि पीड़ित किसान इस अंधेरगर्दी के खिलाफ साल 2017 से लगातार जनसुनवाई में चक्कर काट रहे हैं। 22 अगस्त 2017 और फिर 14 नवंबर 2017 को भी जिला प्रशासन को इसके लिखित सबूत और आवेदन सौंपे गए थे, लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं और धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज एक बार फिर ग्रामीणों ने जिलाधीश महोदय से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष स्थलीय जाँच कराई जाए, रसूखदार के कब्जे से पारंपरिक रास्ता मुक्त कराया जाए और सड़क को उसके मूल स्थान पर ही बनवाया जाए ताकि किसानों को न्याय मिल सके।

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