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MP TOP News : महिला शिक्षकों को 'राहत' या DPI में भ्रष्टाचार की नई खिड़की? CCL उपस्थिति आदेश पर उठे गंभीर सवाल

 


ऑनलाइन सिस्टम का फिर उड़ा मज़ाक

यदि विभाग वास्तव में महिला कर्मचारियों को राहत देना चाहता, तो तकनीकी टीम को निर्देश देकर CCL पोर्टल और ई-अटेंडेंस पोर्टल को आपस में सिंक (Link) करवा सकता था। अवकाश स्वीकृत होते ही हाजिरी अपने आप लग जाती। लेकिन ऐसा न करके, जी-हुजूरी, चक्कर काटने और फाइलों को अटकाने का जो नया लूपहोल तैयार किया गया है, वह 'राहत' कम और 'आफत' ज्यादा नजर आता है।


भोपाल, 21 जून 2026

मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में ट्रांसफर और अटेंडेंस के मकड़जाल में फंसी महिला शिक्षकों के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक नया आदेश तो जारी किया है, लेकिन 'राहत' के नाम पर परोसे गए इस सिस्टम ने प्रशासनिक विसंगतियों और भ्रष्टाचार की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

आयुक्त लोक शिक्षण श्री अभिषेक सिंह द्वारा जारी आदेश (क्रमांक/टी.एम.सी./2026/भोपाल) के मुताबिक, महिला शिक्षकों द्वारा लिए गए संतान पालन अवकाश (CCL) को अब ई-अटेंडेंस में 'उपस्थित' माना जाएगा। वर्तमान में CCL अवधि को 'अनुपस्थित' दर्ज किए जाने के कारण महिला शिक्षकों की अटेंडेंस 90% से कम शो हो रही है, जिससे वे ट्रांसफर के लिए आवेदन नहीं कर पा रही हैं।

कागजी तौर पर यह आदेश बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन धरातल पर इसके क्रियान्वयन के लिए जो 'सिस्टम' तैयार किया गया है, उसने विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


1. डिजिटल युग में 'मैनुअल' अभ्यावेदन का ढोंग क्यों?


जब पूरा मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ऑनलाइन और डिजिटल होने का दावा करता है, तो संतान पालन अवकाश (CCL) स्वीकृत होते ही वह ई-अटेंडेंस पोर्टल पर स्वतः (Automatically) दर्ज क्यों नहीं होता?

एक तरफ सरकार 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ स्वीकृत अवकाश को उपस्थिति में बदलवाने के लिए महिला शिक्षकों को 'राज्य स्तरीय अभ्यावेदन निराकरण समिति' के चक्कर काटने पर मजबूर किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब अवकाश ऑनलाइन या आधिकारिक रूप से स्वीकृत है, तो उसके लिए दोबारा भोपाल में आवेदन क्यों देना पड़े? क्या यह जानबूझकर प्रक्रियाओं को जटिल बनाने की कोशिश है?

2. मध्य प्रदेश ई-ऑफिस पॉलिसी की सरेआम धज्जियां

इस पूरे आदेश में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह है कि आयुक्त महोदय ने आवेदनों के लिए tgrsed.dpi26@gmail.com जैसी एक निजी सेवा प्रदाता (Gmail) की ईमेल आईडी जारी की है।


बड़ा सवाल: मध्य प्रदेश सरकार की ई-ऑफि पॉलिसी (e-Office Policy) के तहत शासकीय पत्राचार और संवेदनशील डेटा के आदान-प्रदान के लिए किसी भी प्राइवेट ईमेल (जैसे Gmail, Yahoo) का उपयोग करना पूरी तरह प्रतिबंधित और अवैध है। इसके लिए केवल सरकारी एनआईसी (@mp.gov.in या @nic.in) के डोमेन का ही उपयोग किया जा सकता है। ऐसे में DPI जैसी राज्य स्तरीय संस्था द्वारा 'Gmail' आईडी का उपयोग करना न सिर्फ नीति के खिलाफ है, बल्कि डेटा सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान लगाता है।


3. 'नो टाइम लिमिट' यानी अंतहीन इंतजार और भ्रष्टाचार का अंदेशा

विभाग ने इस राज्य स्तरीय समिति के लिए निराकरण की कोई समय सीमा (Time Limit) तय नहीं की है। ईमेल मिला या नहीं, परीक्षण कब तक होगा, इसका कोई अता-पता नहीं रहेगा। चूंकि ट्रांसफर की समय सीमा सीमित होती है, इसलिए समय पर उपस्थिति ठीक करवाने के लिए महिला शिक्षक दबाव में रहेंगी।

स्कूल शिक्षा विभाग पहले से ही शिक्षक कर्मचारियों के काम अटकाने और कथित रिश्वतखोरी के आरोपों से घिरा रहता है। ऐसे में समय-सीमा का न होना और जिला स्तर के बजाय सीधे भोपाल (DPI) से निराकरण की व्यवस्था करना, इस आशंका को बल देता है कि DPI में बैठे बाबू और अधिकारियों के लिए 'वसूली की एक नई विंडो' खोल दी गई है।

कलेक्टर और DEO को जिम्मेदारी सौंपकर पल्ला झाड़ा

आदेश में राज्य के सभी कलेक्टर्स, संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलों से प्राप्त आवेदनों को तत्काल राज्य स्तरीय समिति को भेजें। लेकिन जब तक भोपाल की 'स्वतंत्र और समय-सीमा से मुक्त' समिति इस पर कुंडली मारकर बैठी रहेगी, तब तक जिलों के अधिकारी भी असहाय रहेंगे।

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