शिवपुरी। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब का कारोबार इस कदर पैर पसार चुका है कि अब यह ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ रहा है। शिवपुरी शहर के आस-पास के दर्जनों गांवों में खुलेआम बिक रही अवैध शराब को लेकर ग्रामीण कई बार कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के चक्कर काट चुके हैं और दर्जनों ज्ञापन सौंप चुके हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जनता की चीख-पुकार सुनने के बजाय जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है।
जब विधायक की बात का भी नहीं हुआ असर!
अवैध शराब का यह जाल कितना मजबूत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद पोहरी विधानसभा से विधायक कैलाश कुशवाह ने इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। विधायक द्वारा विधानसभा में बकायदा प्रश्न लगाकर जिले में बिक रही अवैध शराब पर जवाब मांगा गया था। उम्मीद थी कि शासन-प्रशासन की इस दखल के बाद आबकारी विभाग हरकत में आएगा और माफियाओं पर शिकंजा कसेगा, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। विधायक के सवाल के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली।
अखबारों की सुर्खियां बनीं, पर नहीं टूटी आबकारी विभाग की चुप्पी
इस गंभीर मुद्दे को लेकर मीडिया और स्थानीय अखबारों में लगातार खबरों का प्रकाशन किया जा रहा है। गांवों में बर्बाद होते परिवारों और बढ़ते अपराधों का सच हर दिन सामने आ रहा है, लेकिन आबकारी विभाग ने जैसे अपनी आंख और कान दोनों बंद कर लिए हैं। खबरों के प्रकाशन के बाद भी विभाग की यह रहस्यमयी चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ 'जांच का झुनझुना'
जब भी ग्रामीण या पीड़ित परिवार कलेक्ट्रेट या आबकारी दफ्तर न्याय की गुहार लगाने पहुंचते हैं, तो उन्हें कार्रवाई के नाम पर सिर्फ "जांच का आश्वासन" थमा दिया जाता है। अधिकारियों का यह आश्वासन अब ग्रामीणों के लिए एक मजाक बन चुका है। कागजों पर जांच की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है और गांवों में कच्ची व अवैध शराब की भट्टियां और बिक्री बेरोकटोक जारी रहती हैं।
ग्रामीणों में पनप रहा है भारी आक्रोश
जनसुनवाई से लेकर विधानसभा तक गूंजने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हो रही है, तो अब ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही इन अवैध अड्डों को बंद नहीं किया गया और केवल कोरे आश्वासन दिए गए, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि क्या आबकारी विभाग अपनी इस कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर अवैध शराब माफियाओं को यूं ही अभयदान मिलता रहेगा?

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